Friday, 18 November 2016

तन ही नहीं मन भी सुंदर, रेखा ने खुली आंखों से देखा सपना किया पूरा

खरगोन। सपने तो हर कोई देखता है और उन्हें पूरे करने के भी लगातार प्रयास करता है। मगर कुछ ही शख्स होते है, जो अपने सपनों को पूरा कर पाते है। उनमें से एक है ग्राम ठीबगांव की श्रीमती रेखा ओमप्रकाश सावल्दे। उन्होंने भी अपने परिवार की आय ब$ढाने के लिए रोजगार के सपने देखे। आखिरकार उन्हें किसी अखबार में स्टार स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान का विज्ञापन देखा और यहीं से सपना पूरा करने की शुरूआत हुई। श्रीमती सावल्दे ने २८ अक्टूबर से २१ दिनों का सिलाई प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में पूरी लगन के साथ टेलरिंग के सभी पहलू सिखे। स्टार स्वरोजगार प्रशिक्षण द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में आए प्रशिक्षणार्थियों को ऋण और अनुदान योजनाओं में दिलाने की सहायता की जाती है। इसी प्रयास में मुद्रा योजनांतर्गत श्रीमती सावल्दे को एक माह के भीतर ही जैतापुर की बैंक ऑफ इंडिया शाखा से 50 हजार रूपए का लोन प्रदान किया। प्राप्त किए गए लोन से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और प्रशिक्षण में दिए गए हुनर और रोजगार के लिए दी गई सलाह के मुताबिक उन्होंने बाजार में उन व्यापारियों से करार किया, जो रेडिमेड कपड़े सिलवाते है। इसी प्रयास में उन्हें शासकीय क्रमांक एक व दो स्कूल की यूनिफार्म बनाने का अवसर मिला और देखते ही देखते उन्होंने 10 से 12 हजार यूनिफार्म बनाकर 20 हजार का शुद्घ मुनाफा लिया। साथ ही वे बाजार के सप्लायरों से करार कर ब्लाउज व पेटीकोट थोक में बनाने का कार्य निरंतर करती रही। 12 सौ रुपए प्रतिमाह की किश्त अदायगी भी निरंतर करती हुई अपने प्रयासों को जारी रखा और व्यक्तिगत ऋ ण लेकर सेंटिंग का कार्य भी प्रारंभ किया। निर्माण कार्यों में उपयोग की जाने वाली सेंटिंग सामग्री किराए पर भी देना प्रारंभ कर दिया। साथ ही अन्य घरेलू महिलाओं को वे स्वयं ब्लाउज व पेटीकोट का प्रशिक्षण देकर रोजगार प्रदान किया है। उनके पास लक्ष्मी सावल्दे, रजनी घोसले व मंजूबाला रोकड़े को प्रति नग के आधार पर रोजगार काम उपलब्ध कराती है। वे एक दिन में बालिकाओं की 50 नग यूनिफार्म और अन्य अंडरगारमेंट बनाने का कार्य कर पाती है। आज रेखा खरगोन पटेल नगर में रहकर ही अपना गृह उद्योग चला रही है और साथ ही अपने तीन बच्चों को अच्छी स्कूलों में शिक्षा भी दिलवा पा रही है।

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